Wednesday, 27 June 2012

आर्थिक स्थिति का सबसे बुरा दौर
देश आर्थिक स्थिति के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है जिसके दूरगामी बूरे नतीजे देश और आम आदमी के लिए घातक हो सकते हैं। देश कभी भी आर्थिक मंदी के रसातल में पहुंच सकता है। महंगाई का विकराल रूप आम आदमी का जीना दुबर कर सकता है।विदेशों का कर्जा देश को कभी भी मुश्किल में डाल सकता है। ऐसे में सरकार मात्र 2014 तक कैसे चल सकती है यही मुद्दा लेकर शासन कर रही है जो एक गम्भीर विडम्बना है। ऐसा नही है की हम इस खतरनाक स्थिति से उभर नही सकते। जब देश भुखमरी के चंगुल में था और देश विकराल अन्न समस्या से जूझ रहा था तब देश के प्रधानमन्त्री श्री लालबहादुर शास्त्री ने लोगो से सोमवार को एक समय का व्रत करने का अनुरोध किया था और गमलों में सब्जी उगाने की बात कही थी और तभी से देश हरित क्रांति की और चल पड़ा था। इसी प्रकार आज की सरकार को भी सकरात्मक रुख रखकर कुछ भ्रष्टाचारियों को पकड़े-काले धन का हल निकाले आम आदमी का विश्वास लेकर उनसे बचत, पट्रोल की बचत, विदेशी मुद्रा के भंडार भरने की अपील करे।कुछ चोरों को पकड़ने से देश की गिरती हालत यदि पटरी पर आ सकती है तो 2014 की इंतजार नही करनी चाहिये। 

 पहले पकड़ो भ्रष्ट और चोर फिर

 नाचेंगे देश में मंगलमयी मोर।

आर एम मित्तल

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